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ब्रश का हर एक स्ट्रोक बार बार मुझसे अपने वहाँ होने का अर्थ जानना चाहता है: अमित कल्ला

ब्रश का हर एक स्ट्रोक बार बार मुझसे अपने वहाँ होने का अर्थ जानना चाहता है, रंग का कतरा कतरा अपनी असल पहचान पाने को आतुर दीखता, जी हाँ, मन निरंतर उनके द्वारा पूछे गए सवालों के जवाब ढूंढने में लगा रहता है, जहाँ मेरे अपने भी उनसे जुड़े कई कई जिज्ञासा भरे सवाल होते हैं। यह पूरी प्रक्रिया बेहद खूबसूरत गति को छू लेती है, जहाँ पीछे लौटने के बहाने अपनी यात्रा के अगले पड़ाव को पाना होता है, बहुत सारे न जाने को जानना और न माने को मानना होता है।निश्चित ही यह सरल नहीं, रंगों में आग भी छिपी होती है पूरी देह को जलाने लगते हैं, तड़पता हूँ मैं उस तपन से, रेत सा पल पल पकता हूँ।

– अमित कल्ला